National Commission for Scheduled Castes (NCSC) के हस्तक्षेप के बाद Department of Financial Services (DFS) ने नया निर्देश जारी किया है। अब प्रमुख वित्तीय योजनाओं में SC लाभार्थियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग होगी।
SC लाभार्थियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग: मुख्य तथ्य
- DFS, वित्त मंत्रालय का विभाग है। उसने 5 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के SLBC/UTLBC Convenors को निर्देश भेजे।
- State Level Bankers’ Committees (SLBCs) और UTLBCs अपनी समीक्षा बैठकों में SC लाभार्थियों की योजना-वार और बैंक-वार संख्या और प्रतिशत दर्ज करेंगी।
- इसमें Pradhan Mantri Mudra Yojana (PMMY), Stand-Up India, PMEGP, PM SVANidhi, CGTMSE और MSME Business Loans शामिल हैं।
- NCSC के सचिव Vivek Kumar Dewangan ने 24 सितंबर 2026 को DFS सचिव को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया कि SLBC रिपोर्टों में SC लाभार्थियों का प्रतिशत नहीं दिखता।
- आयोग के अनुसार इस डेटा के अभाव में Article 338(5)(c) के तहत उसका संवैधानिक दायित्व प्रभावित हो रहा था। यह दायित्व SC के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन है।
- Action-taken report 9 अक्टूबर 2026 तक DFS को देनी है। SLBC और UTLBC को 30 दिनों में की गई कार्रवाई का अद्यतन भी देना है।
- रिपोर्टिंग बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के पास पहले से उपलब्ध डेटा से होगी। इससे अलग समानांतर रिपोर्टिंग नहीं करनी पड़ेगी।
- परीक्षा की दृष्टि: NCSC, Article 338, SLBC और वित्तीय समावेशन योजनाएँ UPSC, राज्य PCS और बैंकिंग परीक्षाओं के महत्वपूर्ण विषय हैं।
- याद रखें: NCSC का संवैधानिक दायित्व Article 338(5)(c) में है। DFS ने 5 अक्टूबर 2026 को SC लाभार्थियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग का निर्देश दिया।
स्रोत: PIB (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय), 7 अक्टूबर 2026
