Mission for Aatmanirbharta in Pulses का पहला वर्ष 11 अक्टूबर 2026 को पूरा हुआ। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की इस ₹11,440 करोड़ की योजना में 2025-26 में दलहन उत्पादन 274.09 लाख टन रहा और आयात बिल मूल्य में 31.52% घटा।
Mission for Aatmanirbharta in Pulses: एक वर्ष की उपलब्धियाँ
- मिशन का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2025 को हुआ। अवधि 2025-26 से 2030-31 तक है। बजट 2025-26 में घोषणा के बाद कैबिनेट ने 1 अक्टूबर 2025 को मंज़ूरी दी।
- नोडल मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare)।
- मुख्य फसलें: तूर (अरहर), उड़द और मसूर — ये सबसे अधिक आयात-निर्भर दलहन हैं।
- कवरेज: 489 जिलों में क्लस्टर दृष्टिकोण। लक्ष्य — दलहन क्षेत्र में 35 लाख हेक्टेयर जोड़कर कुल 310 लाख हेक्टेयर तक पहुँचना।
- 2030-31 तक लक्ष्य: लगभग 350 लाख टन उत्पादन और उपज 1,130 किग्रा/हेक्टेयर।
- 2025-26 (तीसरा अग्रिम अनुमान): उत्पादन 274.09 लाख टन (पूर्व 256.83), क्षेत्र 286.46 लाख हेक्टेयर (पूर्व 277.20), उपज 957 किग्रा/हेक्टेयर (पूर्व 926)।
- आयात मूल्य में 31.52% गिरावट: ₹46,427.60 करोड़ (2024-25) से ₹31,793.59 करोड़ (2025-26)। निर्यात मूल्य में 13.40% वृद्धि: US$855 मिलियन से US$969.53 मिलियन; मात्रा 10.01 लाख टन।
- NAFED और NCCF के माध्यम से तूर, उड़द और मसूर की 100% MSP खरीद चार वर्षों (2025-26 से 2028-29) के लिए सुनिश्चित है। छह वर्षों में 87.5 लाख निःशुल्क बीज किट और 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज; 1,000 दलहन प्रसंस्करण इकाइयाँ प्रस्तावित।
- परीक्षा की दृष्टि: दलहन आत्मनिर्भरता, MSP खरीद एजेंसियाँ (NAFED, NCCF) और उत्पादन/आयात आँकड़े UPSC GS-3, राज्य PCS तथा कृषि परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक होने के बावजूद लंबे समय से बड़ा आयातक रहा — यही विरोधाभास मिशन संबोधित करता है।
- याद रखें: Mission for Aatmanirbharta in Pulses का पहला वर्ष 11 अक्टूबर 2026 को पूरा; परिव्यय ₹11,440 करोड़; 2025-26 में उत्पादन 274.09 लाख टन; आयात बिल 31.52% घटा।
स्रोत: PIB (कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय बैकग्राउंडर), 11 अक्टूबर 2026
