केंद्र सरकार ने Southern Indian Ocean Fisheries Agreement (SIOFA) में भारत के Contracting Party के रूप में शामिल होने (accession) को मंजूरी दी है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी।
SIOFA में भारत का प्रवेश: मुख्य तथ्य
- वर्तमान स्थिति: भारत 2022 से SIOFA का Cooperating Non-Contracting Party (CNCP) है, जिससे Scientific Committee और Compliance Committee जैसे निकायों में उसकी भागीदारी सीमित थी।
- मत्स्यन अधिकार: भारतीय ध्वज वाले जहाज SIOFA क्षेत्र में squid, toothfish, alfonsino और अन्य गैर-प्रवासी मछली भंडारों का अधिकृत मत्स्यन कर सकेंगे।
- दायरा: समझौता मछली, मोलस्क, क्रस्टेशियन और अन्य sedentary प्रजातियों पर लागू है; UNCLOS के Annex I की अत्यधिक प्रवासी प्रजातियाँ और अनुच्छेद 77(4) वाली तटीय देशों की sedentary प्रजातियाँ इससे बाहर हैं।
- सुरक्षा पहलू: भारत SIOFA की High Seas Boarding and Inspection (HSBI) Scheme में भाग लेगा और IUU (अवैध, अप्रतिवेदित और अनियमित) मत्स्यन रोकने में सहयोग करेगा।
- हिंद महासागर के RFMO: क्षेत्र में दो प्रमुख Regional Fisheries Management Organisations हैं, IOTC और SIOFA; भारत 1996 से IOTC का Contracting Party है, जो ट्यूना जैसी अत्यधिक प्रवासी प्रजातियों का नियमन करता है।
- खुला समुद्र: High Seas विश्व महासागर का लगभग 65 प्रतिशत है; यहाँ मत्स्यन में China (21%), Taiwan (13%), Japan (11%), South Korea (11%) और Spain (8%) का वर्चस्व है।
- नीति संदर्भ: यह निर्णय दिसंबर 2025 में जारी Guidelines for High Sea Fisheries के बाद आया है; भारतीय जहाज अभी मुख्यतः EEZ के 60 से 80 नॉटिकल मील के भीतर मत्स्यन करते हैं।
- सचिवालय: SIOFA का सचिवालय Le Port, La Réunion में स्थित है।
- परीक्षा की दृष्टि: RFMO, UNCLOS के प्रावधान, IUU मत्स्यन और Blue Economy से जुड़े प्रश्न UPSC GS-2/GS-3, राज्य PCS और SSC में पूछे जाते हैं।
- याद रखें: भारत 2022 से SIOFA का CNCP था और अब Contracting Party बनेगा; हिंद महासागर में दूसरा RFMO, IOTC, ट्यूना का नियमन करता है और भारत 1996 से उसका सदस्य है।
स्रोत: PIB, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (PRID=2323370), 14 अक्टूबर 2026
