शांति का Nobel पुरस्कार 2026 South Africa की प्रसिद्ध न्यायविद Navanethem “Navi” Pillay को दिया गया है। Norwegian Nobel Committee ने 9 अक्टूबर 2026 को Oslo में इसकी घोषणा की।
शांति का Nobel पुरस्कार 2026: मुख्य तथ्य
- Committee के अनुसार यह पुरस्कार Navi Pillay को “शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों” के लिए मिला है। पुरस्कार पूरा (1/1) उन्हें ही मिला है।
- उनका जन्म 23 सितंबर 1941 को Durban, South Africa में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ। उन्होंने apartheid (रंगभेद) के विरुद्ध संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं का मुकदमों में बचाव किया।
- 1967 में उन्होंने अपनी विधि फ़र्म स्थापित की। 1988 में उन्होंने Harvard University से Doctor of Juridical Science की उपाधि प्राप्त की।
- 1995 में वे South Africa के High Court की न्यायाधीश बनीं। इसके बाद वे International Criminal Tribunal for Rwanda (ICTR) की न्यायाधीश और अध्यक्ष रहीं तथा International Criminal Court (ICC) में भी न्यायाधीश रहीं।
- 2008 से 2014 तक वे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (UN High Commissioner for Human Rights) रहीं।
- ICTR में उनकी भूमिका से यह स्थापित हुआ कि बलात्कार और यौन हिंसा मानवता के विरुद्ध अपराध और नरसंहार (genocide) हो सकते हैं। दुष्प्रचार फैलाने के आधार पर नरसंहार के लिए उकसाने का आरोप भी पहली बार इसी मामले में लगा।
- 2021 से 2025 तक उन्होंने Occupied Palestinian Territory पर UN Independent International Commission of Inquiry की अध्यक्षता की। 2019 से वे International Court of Justice (ICJ) में Myanmar के विरुद्ध नरसंहार मामले में ad hoc न्यायाधीश हैं।
- Committee ने कहा कि पहला शांति Nobel पुरस्कार 125 वर्ष पहले दिया गया था। शांति का Nobel पुरस्कार Oslo (Norway) में दिया जाता है, जबकि अन्य Nobel पुरस्कार Stockholm (Sweden) में दिए जाते हैं।
- परीक्षा की दृष्टि: Nobel विजेता, उनका देश और कार्यक्षेत्र UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और राज्य PCS परीक्षाओं में लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं। ICTR, ICC और ICJ जैसी संस्थाओं से जुड़े प्रश्न भी आते हैं।
- याद रखें: शांति का Nobel पुरस्कार 2026 भारतीय तमिल मूल की South African न्यायविद Navi Pillay को मिला है। वे 2008 से 2014 तक UN मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं।
स्रोत: NobelPrize.org (Norwegian Nobel Committee प्रेस विज्ञप्ति), 9 अक्टूबर 2026
