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मृदंगम वादक Guruvayur Dorai का निधन: Pudukottai शैली के प्रमुख कलाकार, 2025 में मिला था Padma Shri

प्रसिद्ध मृदंगम वादक और Padma Shri सम्मानित Guruvayur Dorai का 10 अक्टूबर 2026 को Chennai में निधन हो गया। वे कर्नाटक संगीत में मृदंगम की Pudukottai शैली के प्रमुख प्रतिनिधि माने जाते थे।

Guruvayur Dorai: मुख्य तथ्य

  • Guruvayur Dorai का जन्म 2 जुलाई 1935 को Kerala के Guruvayur में हुआ था। वे लगभग आठ दशक तक कर्नाटक संगीत में सक्रिय रहे।
  • पाँच वर्ष की आयु में polio होने के बाद उनकी पढ़ाई बाधित हुई। इसके बाद उनके पिता ने उन्हें मृदंगम सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • उनका प्रारंभिक प्रशिक्षण Palghat Subbaiyar और E.P. Narayana Pisharody से हुआ। बाद में उन्होंने प्रसिद्ध मृदंगम वादक Palani Subramania Pillai से गुरुकुल पद्धति में शिक्षा ली।
  • आठ वर्ष की आयु में उन्होंने गायक Chembai Vaidyanatha Bhagavathar के साथ अपना पहला मंच प्रदर्शन (arangetram) किया।
  • वे कई वर्षों तक M.S. Subbulakshmi के नियमित मृदंगम संगतकार रहे। उन्होंने Semmangudi Srinivasa Iyer, M.D. Ramanathan और M. Balamuralikrishna जैसे कलाकारों के साथ भी संगत की।
  • उन्हें 2025 में Padma Shri से सम्मानित किया गया। उन्हें Sangeet Natak Akademi Award, Sangeet Natak Akademi Tagore Ratna और Tamil Nadu सरकार का Kalaimamani सम्मान भी मिला।
  • मृदंगम दो मुख वाला ताल वाद्य (percussion instrument) है। यह कर्नाटक संगीत में मुख्य ताल संगत का वाद्य है।
  • परीक्षा की दृष्टि: प्रसिद्ध कलाकारों के निधन, उनके वाद्य, संगीत शैली और प्राप्त सम्मान SSC, रेलवे, बैंकिंग और राज्य PCS परीक्षाओं के कला-संस्कृति खंड में पूछे जाते हैं।
  • याद रखें: Guruvayur Dorai मृदंगम की Pudukottai शैली के प्रमुख वादक थे। उन्हें 2025 में Padma Shri मिला था और उनका निधन 10 अक्टूबर 2026 को Chennai में हुआ।

स्रोत: The Hindu और Kerala Kaumudi, 10 अक्टूबर 2026