सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने ‘Strategy for Environmental Economic Accounts in India 2026-2030’ दस्तावेज़ जारी किया है। यह भारत में पर्यावरण लेखांकन के विकास का अगला रोडमैप है।
Environmental Economic Accounts Strategy 2026-2030: मुख्य तथ्य
- MoSPI System of Environmental-Economic Accounting (SEEA) का पालन करता है। इस ढाँचे को United Nations Statistical Commission ने मान्यता दी है।
- MoSPI ने 2018 से पर्यावरण लेखों पर काम शुरू किया था।
- पिछला दस्तावेज़ ‘Strategy for Environmental-Economic Accounts in India 2022–2026’ था। इसमें Material Flow Accounts, Ocean Accounts और Energy Accounts जैसे क्षेत्र थे।
- नया दस्तावेज़ 2026-2030 के लिए है। इसमें वन, खनिज, मृदा, भूमि, जल, carbon stock, जैव विविधता और पर्यावरण सांख्यिकी जैसे विषय शामिल हैं।
- ये विषय “Green National Accounts in India: A Framework” रिपोर्ट और SEEA-CF ढाँचे की सिफ़ारिशों के आधार पर चुने गए हैं।
- System of National Accounts 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता मिलने से इसका महत्व बढ़ा है।
- यह दस्तावेज़ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी मार्गदर्शक ढाँचा है। इसे 7 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया।
- परीक्षा की दृष्टि: Green GDP, SEEA और प्राकृतिक संसाधन लेखांकन UPSC अर्थव्यवस्था और पर्यावरण खंड के महत्वपूर्ण विषय हैं।
- याद रखें: MoSPI का नया दस्तावेज़ ‘Strategy for Environmental Economic Accounts in India 2026-2030’ UN के SEEA ढाँचे पर आधारित है।
स्रोत: PIB (सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय), 7 अक्टूबर 2026
