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SEBI का प्रस्ताव: हर सार्वजनिक निर्गम के लिए Monitoring Agency अनिवार्य, सुझाव 3 नवंबर 2026 तक

Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने 13 अक्टूबर 2026 को एक consultation paper जारी कर प्रस्ताव रखा कि हर सार्वजनिक निर्गम के लिए Monitoring Agency की नियुक्ति अनिवार्य हो, चाहे निर्गम का आकार कुछ भी हो। यह निर्गम से जुटाई गई राशि के उपयोग की निगरानी से जुड़ा है।

SEBI Monitoring Agency प्रस्ताव: मुख्य तथ्य

  • आधार: SEBI (LODR) Regulations, 2015 की समीक्षा के लिए गठित Working Group की पहली रिपोर्ट का Chapter I; Working Group के अध्यक्ष SEBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक V S Sundaresan।
  • मुख्य प्रस्ताव: सभी निर्गमों के लिए Monitoring Agency अनिवार्य; इसके लिए निर्गम आकार की गणना में offer for sale (OFS) का हिस्सा शामिल नहीं होगा।
  • सीधी रिपोर्ट: Monitoring Agency अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय में सीधे Stock Exchanges को देगी।
  • असहयोग: सूचीबद्ध कंपनी के सहयोग न करने पर रिपोर्ट उपलब्ध सर्वोत्तम जानकारी पर आधारित होगी और उसके साथ “Statement of non-cooperation” होगा।
  • जुर्माना: असहयोग के प्रत्येक मामले पर ₹50,000 का जुर्माना Stock Exchanges लगाएँगे; लगातार चूक पर प्रवर्तकों (promoters) के demat खाते फ्रीज़ करने की प्रक्रिया।
  • सुधार: कंपनी द्वारा पूरी जानकारी देने पर एजेंसी 15 दिनों में पूर्ण रिपोर्ट देगी; Stock Exchanges रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट पर प्रमुखता से दिखाएँगे।
  • सार्वजनिक सुझाव: 3 नवंबर 2026 तक आमंत्रित।
  • परीक्षा की दृष्टि: SEBI, LODR और ICDR Regulations, IPO व OFS की अवधारणा बैंकिंग, UPSC GS-3 और SEBI/RBI Grade B परीक्षाओं में उपयोगी हैं।
  • याद रखें: SEBI (13 अक्टूबर 2026) ने हर सार्वजनिक निर्गम के लिए Monitoring Agency अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा; असहयोग पर ₹50,000 प्रति मामला; सुझाव 3 नवंबर 2026 तक।

स्रोत: SEBI consultation paper, 13 अक्टूबर 2026; GKToday, 14 अक्टूबर 2026